सबसे धनी 21 भारतीय अरबपतियों के पास 70 करोड़ भारतीयों से अधिक संपत्ति

सबसे धनी 21 भारतीय अरबपतियों के पास 70 करोड़ भारतीयों से अधिक संपत्ति

  • By Akshay Atmaram Tarfe
  • 15 Jan, 2023

जनवरी 16, 2023, नई दिल्ली - केवल 5 प्रतिशत भारतीयों के पास देश की संपत्ति का 60 प्रतिशत हिस्सा है जबकि नीचे के 50 प्रतिशत के पास देश की संपत्ति का मात्र 3 प्रतिशत हिस्सा है।ऑक्सफैम की नवीनतम रिपोर्ट ‘सरवाईवल ऑफ़ द रिचस्ट: द इंडिया स्टोरी’ ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि भारत के सबसे धनी व्यक्ति की संपत्ति वर्ष 2022 में 46 प्रतिशत बढ़ी है। इस रिपोर्ट ने बताया कि इन अरबपति के अनरियलाईज्ड गेन्स पर एकबारगी 20 प्रतिशत टैक्स से (2017-21 के दौरान) 1.8 लाख करोड़ रुपए प्राप्त किए जा सकते हैं।4 यह धनराशि एक वर्ष के दौरान प्राथमिक विद्यालयों में 50 लाख अध्यापकों को रोजगार देने के लिए प्राप्त है।5 ऑक्सफैम ने केन्द्रीय मंत्री से अपील की है कि इस अत्यधिक विषमता को समाप्त करें व आगामी बजट में संपत्ति टैक्स जैसे समतावादी कदम उठाएं।

वर्ष 2012-2021 के दौरान जो संपत्ति संवृद्धि भारत में हुई है, उसका 40 प्रतिशत ऊपर की मात्र 1 प्रतिशत जनसंख्या को गया है, जबकि नीचे की 50 प्रतिशत जनसंख्या को मात्र 3 प्रतिशत हिस्सा मिला है।6 आॅक्सफैम इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट (जो विश्व आर्थिक मंच के डेवो सम्मेलन - स्विटजरलैंड में पहले दिन रिलीज हुई) में बताया गया है कि भारत में अरबपतियों की संख्या वर्ष 2020 में 102 से बढ़कर वर्ष 2022 में 166 हो गई। भारत के 100 सबसे धनी की कुल संपत्ति 54 लाख करोड़ रुपए पहंुच गई, जिससे 18 महीने का केन्द्रीय बजट बन सकता है।

ऑक्सफैम इंडिया के सी.ई.ओ. अमिताभ बेहर ने कहा - “जहां देश भूख, बेकारी, महंगाई व स्वास्थ्य आपदाओं से जूझ रहा है, वहां भारत के अरबपति अच्छा कमा रहे हैं। भूख से त्रस्त भारतीयों की संख्या वर्ष 2018 मे 19 करोड़ थी, वर्ष 2022 में 35 करोड़ हो गई। वर्ष 2022 में 5 वर्ष से कम आयु वर्ग के 65 प्रतिशत बच्चों की मौत इस कारण हुई। कोविड के व्यापक दुख-दर्द को देखते हुए भारतीय सरकार को निर्धनता व अन्याय के विरुद्ध बड़े कदम उठाने चाहिए थे, पर यह नहीं हो सका व धनी वर्ग पर अधिक ध्यान दिया गया।”

सबसे धनी 10 भारतीयों की कुल संपत्ति 27 लाख करोड़ रुपए है।9 पिछले वर्ष से इसमें 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह संपत्ति स्वास्थ्य व आयुष मंत्रालयों के 30 वर्ष के बजट, शिक्षा मंत्रालय के 26 वर्ष के बजट व मनरेगा के 38 वर्ष के बजट के बराबर है।

वर्ष 2020 से विश्व स्तर पर सबसे धनी 1 प्रतिशत ने नई संपत्ति के दो-तिहाई हिस्से को प्राप्त किया है। यह विश्व के नीचे के 90 प्रतिशत लोगों के हिस्से से छः गुणा अधिक है। अरबपतियों की संपत्ति विश्व स्तर पर 2.7 अरब डालर प्रति दिन की दर से बढ़ रही है जबकि 1.7 अरब मजदूरों की आय वृद्धि महंगाई से पिछड़ रही है।

भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में निर्धनों से जबरन कर्ज वसूली की जाती है, पर अधिकतर कारपोरेट क्षेत्र को दिए गए 11 लाख करोड़ रुपए के कर्ज सार्वजनिक बैंकों द्वारा रद्द किए गए।

विश्व स्तर पर धनी वर्ग को आय कर में पिछले 40 वर्ष में छूट दी गई है, जबकि जनसाधारण पर अप्रत्यक्ष कर का बोझ बढ़ा है।

कारपोरेट टैक्स में वर्ष 2019 में कमी की गई व छूट तथा प्रोत्साहन के रूप में वर्ष 2021 में 1,03,285 करोड़ रुपए का लाभ उन्हें मिला13 जो 1.4 वर्ष के लिए मनरेगा बजट के बराबर है।

अमिताभ बेहर, ऑक्सफैम भारत सी.ई.ओ. ने कहा - “धनी वर्ग के पक्ष में खड़ी व्यवस्था में सीमान्त के लोग - दलित, आदिवासी, मुस्लिम, महिलाएं, अनौपचारिक क्षेत्र के मेहनतकश - बढ़ती कठिनाईयों का सामना कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि धनी वर्ग पर टैक्स बढ़ा कर उनसे समुचित हिस्सा प्राप्त किया जाए। हम वित्त मंत्री से अपील करते हैं कि वे संपत्ति टैक्स व इनहेरिटेंस टैक्स जैसे टैक्स लाएं जिससे विषमता कम हो।”

ऐसे करों से सरकार को अधिक वित्तीय संसाधन प्राप्त होंगे तो बहुत जरूरी सार्वजनिक सेवाओं व जलवायु बदलाव कम करने जैसे महत्त्वपूर्ण कार्य आगे बढ़ सकेंगे। विषमता के विरुद्ध भारतीय संघर्ष अलायंस के सर्वेक्षण के अनुसार 80 प्रतिशत लोग धनी वर्ग व कोविड के दौरान अधिक मुनाफा कमाने वालों पर अधिक टैक्स का समर्थन करते हैं। 90 प्रतिशत ने कहा कि बजट में विषमता कम करने वाले कदम बढ़ाएं जैसे सबके लिए सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य अधिकार, महिला हिंसा कम करने के उपाय आदि।

ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रीला बुचर ने कहा - “धनी वर्ग पर कर कम करने में कोई लाभ नहीं मिलेगा जबकि अत्यधिक धनी पर कर लगाना विषमता कम करने व लोकतंत्र सशक्त करने के लिए, वैज्ञानिक प्रगति, मजबूत सार्वजनिक सेवाओं खुशहाल व स्वस्थ समाजों के लिए जरूरी है।”

ऑक्सफैम ने वित्त मंत्री से यह संस्तुतियां की हैं -

सबसे धनी 1 प्रतिशत की संपत्ति पर कर

सबसे धनी अभिजातों का नीति निर्धारण व राजनीति में बहुत प्रभाव है, जिससे उनकी संपत्ति बढ़ते जाने में भी मदद मिलती है। इस चक्र को तोड़ने के लिए सबसे ऊपर के 1 प्रतिशत धनी व्यक्तियों की संपत्ति पर स्थाई तौर पर कर लगना चाहिए, व अत्यधिक धनी व्यक्तियांे से अधिक कर प्राप्ति पर समुचित ध्यान देना चाहिए। संपत्ति टैक्स, विंडफाल टैक्स व इनहेरिटेंस टैक्स के माध्यम से अधिक संसाधन जुटाने चाहिए।

निर्धन व सीमान्त लोगों पर कर का बोझ कम करना

जो निर्धन व मध्यम वर्ग के दैनिक उपयोग व जरूरत की वस्तुए हैं, उन पर जीएसटी की दर कम करनी चाहिए व विलासिता की वस्तुओं पर जीएसटी की दर बढ़ानी चाहिए। इस तरह कर व्यवस्था समतावादी बन सकेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के प्रावधान के अनुसार स्वास्थ्य के लिए आवंटन को वर्ष 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत कर देना चाहिए ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य मजबूत हो सके व लोगों पर बोझ कम हो सके, वे किसी स्वास्थ्य के संकट का सामना बेहतर ढंग से कर सकें।

विभिन्न सामाजिक-आर्थिक श्रेणियों व क्षेत्रीय आधार पर स्वास्थ्य क्षेत्र में जो विषमताएं हैं, उन्हें दूर करना चाहिए। जिला अस्पतालों से जुड़े हुए मेडिकल कालेज खोलने चाहिए, विशेषकर पर्वतीय, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में ताकि स्वास्थ्य सेवाओं व स्वास्थ्यकर्मियों की कमी न रहे। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, व सरकारी अस्जतालों को बेहतर व मजबूत करना चाहिए, वहां पर्याप्त डाक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था होनी चाहिए, व जरूरी साज-समान उपलब्ध होना चाहिए ताकि उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवा आवास व कार्यस्थल के 3 किमी. के दायरे में उपलब्ध हो सके।

शिक्षा में सुधार

शिक्षा के लिए सरकार के बजट के आवंटन के बारे में यह व्यापक मान्यता है कि यह सकल घरेलू उत्पाद का 6 प्रतिशत होना चाहिए। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी मान्यता मिली है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार को योजनाबद्ध ढंग से आवंटन बढ़ाना चाहिए।

शिक्षा में मौजूदा विषमताओं को दूर करने के लिए इसके अनुकूल कार्यक्रमों को बढ़ना चाहिए, जैसे कि अनुसूचित जातियों व जनजातियों के छात्रों, विशेषकर छात्राओं के लिए मैट्रिक के पहले व बाद की छात्रवृत्तियां।

मजदूरों की सुरक्षा व बेहतर स्थिति

कठिन दौर से गुजरते हुए व महंगाई से जूझते हुए मजदूरों की सुरक्षा बढ़ाने व उनकी आर्थिक व कार्यस्थितियों को मजबूत करने के लिए प्रयास महत्त्वपूर्ण हैं।

 

पूरी रिपोर्ट यहाँ पे पढ़िए - https://www.oxfamindia.org/knowledgehub/workingpaper/survival-richest-india-story 


Contact : abhirr@oxfamindia.org


Related Stories

Others

09 Aug, 2016

Mumbai

Teams are registering for the OxfamTrailwalker. Are you?

Registrations for the third edition of the Mumbai Trailwalker are now open! --> Everyday more and more people are signing up for the ultimate endurance test and the one-of-a-kind team challenge and raise funds to reduce extreme poverty and inequality in India.
Read More

Humanitarian Response and DRR

08 Aug, 2016

Assam

Low on food in Assam, uncertain of the future

Makita Daw, 62, from Mishimi Ati village in the flood affected Jorhat district has been facing severe challenges since 8 July 2016. She has a food grain machine which she is unable to use in the absence of electricity. Donate to help people like Makita.
Read More

Humanitarian Response and DRR

03 Aug, 2016

Assam

Assam Floods: What your donations are making possible

Oxfam India is providing shelter and hygiene kits to families in the worst affected districts of Assam. The kits include essentials like tarpaulins, groundsheets, blankets, mosquito nets and a specially designed bucket which prevents water contamination.
Read More

03 Aug, 2016

This Assam village had not seen a flood in decades

<div class="contentTexts"><h5 class="txt777">Sharelines</h5><div class="tweetShare"><h4><a class="link" href="

Read More

img Become an Oxfam Supporter, Sign Up Today One of the most trusted non-profit organisations in India